Saturday, January 21, 2017

શાંત રહી ને પણ દેખાય તે "નદી ની વિશાળતા" છે,,, 
અને
ઝરણાંઓને "અસ્તિત્વ સાબિત કરવા" અવાજ કરવો પડે છે...

Wednesday, January 18, 2017

  प्रख्यात लेखक और उनके महत्वपूर्ण पुस्‍तकें

1. महात्‍मा गांधी - कांक्‍वेस्‍ट ऑफ शेल्‍फ, माई एक्‍सपेरीमेंट विद ट्रुथ, हिंद स्‍वराज, इंडिया ऑफ माई ड्रीम्‍स

2. उमा शंकर जोशी - निशीथ

3. मैथिली शरण गुप्‍त - साकेत

4. मुंशी प्रेमचंद - रंगभूमि, गोदान, शतरंज के खिलाड़ी, गबन, कायाकल्‍प, प्रेमाश्रय

5. पी.वी नरसिंह राव - द इन्‍साइडर

6. अटल बिहारी वाजपेयी - राजनीति की रपटीली राहें, संसद के तीन दशक

7. सुभाष चन्‍द्र बोस - द इंडियन स्‍ट्रगल

8. सरोजिनी नायडू - द गोल्‍डन थ्रेसहोल्‍ड़, द बर्ड ऑफ टाइम, द ब्रोकन विंग, द सांग्‍स ऑफ इंडिया

9. आर. के नारायण - मि.संपत, द गाइड़, माई डेज, द वेंडर ऑफ स्‍वीट़्स, द डार्करूम, टैलिस्‍मैन, मालगुडी ड़ेज

10. अरूंधती रॉय - द गॉड ऑफ स्‍मॉल थिग्ंस, एन ऑर्डिनेरी पर्सन्‍स गाइड़

11. डॉ राजेन्‍द्र प्रसाद - इंडिया डिवाइडेड

12. रवीन्‍द्र नाथ टैगोर - गीताजंली, क्रिसेंट मून, द गार्डनर, चांडालिका, द हंग्रो स्‍टोन्‍स, द कोर्ट डांसर, किंग ऑफ डार्क वेबंर, पोस्‍ट ऑफिस, दरिलिजन ऑफ मैन

13. जवाहर लाल नेहरू - एन ऑटो बायोग्राफी, डिस्‍कवरी ऑफ इंडिया, ग्लिम्‍पसेज ऑफ वर्ल्‍ड हिस्‍ट्री

14. हरीसेन - इलाहबाद प्रशस्ति

15. वी. डी सावरकर - द इंडियन वार ऑफ इंडिपेन्‍डेंस

16. एस राधाकृषणन - हिंदू व्‍यू ऑफ लाइफ

17. अरविंद घोष - न्‍यू लैम्‍प्स फॉर ऑल्‍ड, लाइफ डिवाइन

18. वी एस कॉमथ - इंडिया ऑफ अवर ड्रीम

19. कुलदीप नैय्यर - इंडिया, द क्रिटिकल इयर्ज, द जजमेंट, इंडिया हाऊस, बियोन्‍ड द लाइन्‍स : एन ऑटोबायो ग्राफी

20. तवलीन सिंह - कश्‍मीर : ए ट्रेजडी ऑफ एरर्स

21. खुशवंत सिंह - ट्रेन टु पाकिस्‍तान, ट्रुथ लव एंड ए लिटिल मेलिस

22. डॉ. ए पी जे. अब्‍दुल कलाम - विंग्स ऑफ फायर (अरूण तिवाड़ी और अब्‍दुल कलाम), 2020 – ए विजन फोर द न्‍यू मिलेनियम, इग्‍नाइटेड माइड्ंस माई जर्नी

23. विष्‍णु - पंचतंत्र

24. भीष्‍म साहनी - तमस

25. पी जी. वुडहाउस - जीव्‍स

26. भगस्‍टा - पोइरोट (जासूसी कहानियां)

27. रस्किन - रस्‍टी

28. मैगस्‍थ्‍नीज - डंडिका

29. कालिदास - मेघदुत, मालविकाग्निमित्र, रघुवमसा कुमार संभवम्, शकुंतला, विक्रम उर्वसी

30. कार्ल मार्क्‍स - दास कैपिटल

31. जॉर्ज ओरवैल - नाइन्‍टीन एटी फोर

32. कृष्‍णदेवराय - अमुक्‍तमलयादा

33. सलमान रूश्‍दी - मिडनाइट चिल्‍ड्रन (1981), शेम (1983), द सैटेनिक वर्सेज (1988), मुर्स लास्‍ट साइ (1995)

34. भरत मुनि - नाट्य शास्‍त्र

35. जयप्रकाश नारायण - व्‍हाई सोश लिज्‍म

36. जे एम केन्‍स - एम्प्‍लायमेंट, इंट्रेस्‍ट ऐंड मनी

37. जे के राउलिग - हैरी पॉटर

38. जॉन रस्किन - अन्‍टू इ लास्‍ट

39. वराह मिहिर - पंच सिद्धन्तिका

40. भवभूति - उत्तरराम चरित, मालती माधव

41. कैथ्‍रिन मैयो - मदर इंडिया

42. विलियम शेक्‍सपीयर - मैकबेथ

43. मनोहर गलगांवकर - दि मैन हू क्ल्डि गांधी

44. सत्‍यजीत राय - माई इयर्स विद अपु

45. मोहन राकेश - आधे अधुरे

46. बंकिम चन्‍द्र चटर्जी - आनंद मठ

47. तुषार गांधी - लेट्स किल गांधी

48. विशाखा दत्त - मुद्रराक्षस, देवी चन्‍द्रगुप्‍तम

49. कल्‍हण - राजतंरगिणी

50. पाणिणी - अष्‍ठाध्‍यायी

51. कौटिल्‍य - अर्थशास्‍त्र

52. जयदेव - गीतगोविन्‍द

53. पंतजली - महाभाष्‍य

54. बाणभट्ट - कादम्‍बरी, हर्षचरित्र

55. माद्य - शिशुपालवध

56. जयानक - पृथ्‍वीराज विजय, प्रबंधकोष

57. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला - अनामिका, गुंजन, परिमल, जूही की कली

58. तुलसीदास - दोहावली, कवितावली, विनय पत्रिका, रामचरित्र मानस

59. मलिक मुहम्‍मद जायसी - पद्मावत

60. बालगंगाधर तिलक - गीता रहस्‍य

61. अनीता देसाई - क्राई द पिकोक

62. वी. एस नॉयपाल - ए बेंड इन द रिवर

63. विक्रम सेट - टू लाइवज

64. आर. वेकटरमन - माई प्रसिडेसियल ईयर्स

66. एस राधाकृष्‍णन - द हिंदुं व्‍यू ऑफ लाइफ

67. एन सजीव रेड्डी - विदाऊट फियर ओर फेवर

68. नेल्‍सन मंडेला - लॉग वाक टू फ्रीडम

Tuesday, January 17, 2017

*દુખ Auto-update નથી તોય Download થઇ જાય છે..*

*સુખમા Virus નથી તોય Hang થઈ જાય છે..*

*લાગણીઓનુ SD card નથી તોય Storeg થઈ જાય છે..*

*સંબંધમાં Cemero નથી તોય Selfy થઈ જાય છે..*

*જીંદગી Whatsapp નથી તોય Last Seen થઈ જાય છે..*

*માણસ Mobile નથી તોય બદલાઈ જાય છે..*

*
*"आनंद" एक "आभास" है*
*जिसे हर कोई ढूंढ रहा है...*

*"दु:ख" एक "अनुभव" है*
*जो आज हर एक के पास है...*

*फिर भी जिंदगी में वही "कामयाब" है*
*जिसको खुद पर "विश्वास" हे..!!*
જયાં સુધી આપણે એ લોકોને માફ નથી કરતા જેમણે આપણને દુ:ખી કર્યા હોય,

ત્યાં સુધી તેઓ આપણા મનમાં ભાડુ ભર્યા વગર મફતની જગા રોકી રાખે એવું લાગે....!
*जो सफर की*
*शुरुआत करते हैं,*
*वे मंजिल भी पा लेते हैं.*
*बस,*
*एक बार चलने का*
*हौसला रखना जरुरी है.*
*क्योंकि,*
*अच्छे इंसानों का तो*
*रास्ते भी इन्तजार करते हैं..*
*रोने* से तो *आंसू* भी पराये हो जाते हैं ,
लेकिन *मुस्कुराने* से ...
पराये भी अपने हो जाते हैं ।।
मुझे वो रिश्ते पसंद है ,
जिनमें *मैं* नहीं *हम* हो ,
*इंसानियत* दिल में होती है ,
*हैसियत* में नही ,
*उपरवाला कर्म* देखता है ,
*वसीयत* नही ..
*जिंदगीे आसान बनानी पड़ती है.....*

*कुछ 'अंदाज' से,*
*कुछ 'नजर अंदाज' से...
*વેરમાં હમેશા વાંધો હોય છે, જયારે સ્નેહ માં હમેશા સાંધો હોય છે...!!!*
*"END" અને "AND"*
*બંને સરખી રીતે બોલાય છે.*
*પરંતુ..*
*એક મા પુરુ કરવાની વાત છે અને બીજા મા જોડવાની કળા છે..*.
कुछ इसलिए भी पंसद आते है सच बोलने वाले लोग...

कि वो खुद टुट जाते है मगर किसी का दिल टुटने नही देते..
*मुस्कुराहटें झूठी भी*
*हुआ करती हैं यारों.*

*इंसान को देखना नहीं*
*बस समझना सीखो..*
*ખિસ્સુ ભરેલુ હતું,,
ત્યારે સંબંધો ઘણા મળ્યા..*
*ખિસ્સુ ખાલી થયું,,
ત્યારે અનુભવ ઘણા મળ્યા..!!*

18 January Din Mahima

1896 में आज ही के दिन पहली बार एक्स रे मशीन को दुनिया के सामने लाया गया. एक्स रे मशीन चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी अविष्कार की तरह सामने आई. इसमें एक्स किरणों के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरण की तकनीक का इस्तेमाल होता है. इस विकिरण की मदद से शरीर के भीतर हड्डियों की तस्वीर ली जाती है. एक्स किरणों का इस्तेमाल इस तरह की चिकित्सीय जांच के अलावा स्टेरिलाइजेशन और फ्लोरेसेंस में भी होता है.

एक्स रे की खोज ब्रिटेन के वैज्ञानिक विलियम क्रुक्स की इलेक्ट्रिकल डिसचार्ज ट्यूब की मदद से हुई. 1895 में विलहेल्म रोएंटगेन ने क्रुक्स ट्यूब पर प्रयोग के दौरान एक्स किरणों के विकिरण को देखा. पहली एक्स रे तस्वीर रोएंटगेन ने अपनी पत्नी के हाथ की निकाली. इस तस्वीर में हड्डियों के साथ अंगूठी की भी आकृति उभर कर सामने आई. इससे काफी कुछ स्पष्ट हो गया. 1896 में एचएल स्मिथ ने एक्स किरणों के विकिरण की तकनीक का इस्तेमाल कर पहली एक्स रे मशीन बनाकर 18 जनवरी को दुनिया के सामने पेश की.

Thursday, January 12, 2017

કર્મ જ એક એવી હોટલ છે, જયાં આપણે ઓડઁર નથી આપવો પડતો,
આપણ ને એ જ પીરસવામાં આવે છે, જે આપણે રાંધ્યું હોય છે.....

Wednesday, January 11, 2017

*_मुँह पर कड़वा बोलने_*
*_वाले लोग कभी धोखा_*
*_नहीं देते…_*

*_डरना तो मीठा बोलने_*
*_वालों से चाहिए...,_*

*_जो…… दिल में नफरत_*
*_पालते हैं_*

*_और_*

*_वक़्त के साथ बदल_*
*_जाते हैं..…*
આજ કાલ લોકો કહે છે કે તું બદલાઇ ગયો છે..
ત્યારે મારો કહેવાનો અર્થ માત્ર એટલો જ છે..
કે બીજાની અપેક્ષા મુજબ જીવવાનું...
અમે બંધ કરી દીધું છે...

Monday, January 9, 2017

જેમ જેમ સમજણ
વધતી જાય...

તેમ તેમ જીવનમાં
મૌનનો મહિમા વધતો
જાય..!!

Sunday, January 8, 2017

જુવોને આ સ્વીચબોર્ડ.......
ઘરના એક ખૂણામાં
એકલતા અનુભવતું હતું...
હવ નિરંતર ચાર્જરોની હૂંફ
મળવાથી
સંબંધોનાં કનેકશનથી
કેવું જોડાયેલું રહે છે..
દુનિયા માં રંગ ઘણા છે પણ

રંગોળી

કે

મેઘધનુષ

થવું હોય તો એક થવુ પડે
*एक*
*बेहतरीन जिंदगी जीने के लिए*
*यह*
*स्वीकार करना भी जरुरी है*
*कि* ...
*सब कुछ*
*सबको नहीं मिल सकता.*...
*ચંદ્રકાન્ત બક્ષી ની વ્યંગ અને કટાક્ષ શૈલીમાં 1992 માં લખાયેલી કેટલીક વ્યાખ્યાઓ --*


*ભણેલો :-* જે 1 મિનીટમાં ઉંચા અવાજે 30 અને મનમાં 35 શબ્દો વાંચી શકે પણ સમજ્યો કૈં ના હોય

*ખતરનાક કામ :-* 'એક' ખાડા ને 'બે' કુદકા મા પાર કરવો !!

*પતિ :-* પ્રેમીમાંંથી પ્રેમ કાઢી લીધાં પછી જે બાકી રહ્યુ તે

*મિટિંગ :-* જયાં 'મિનિટસ' સચવાય છે.. કલાકો બગાડીને..

*શિસ્ત :-* શરીર ની ઇચ્છા વિરૂદ્ધ ફક્ત સંકલ્પના જોરે શરીર પાસે કરાવાતું વઇતરું

*Sense of humor :-* જે પત્નીમાં હોય તો લગ્ન જીવન તોડી નાંખે અને પતિમાં હોય તો ટકાવી રાખે તેવો ગુણ

*કાયદો :-* કરોળિયા નું એવું જાળું... જે ફક્ત નાના જીવડાં જ ફસાવી શકે

*સલાહકાર :-* જે તમામ વસ્તુ કેમ કરવી તેની સલાહ આપે પણ પોતાની સાયકલ પણ સીધી પાર્ક ના કરી શક્તો હોય

*ગુજરાતી :- એવી પ્રજા જેને માત્ર 'શુભ' ઉપર વિશ્વાસ નથી, સાથે 'લાભ' પણ જોઇએ*

*શેરબજાર :-* એવું જાદુઈ બજાર જે આપણે ખરીદીએ પછી પડી જાય અને વેચીએ પછી વધી જાય

*દારૂબંધી :-* જયાં દારૂ બોટલ નાં બદલે પીપ માં મળે એવી રાજ્ય વ્યવસ્થા!!!

*બુદ્ધિજીવી :-* જે ચર્ચા કરતો હોય ત્યારે સામે વાળો તો ના સમજે પણ પોતેંય કાંઇ નાં સમજતો હોય

*આદર્શ પતિ :-* ઘરમાં કલર ટીવી હોવાં છતા રેડિયો FM ઉપર જુના ગીતો સાંભળ્યા કરતું પ્રાણી!!
*घमंड से अपना सर ऊँचा न करे*

*जीतने वाले भी अपना गोल्ड मैडल*

*सिर झुका के हासिल करते है*
....✍

Saturday, January 7, 2017

એક વાર અર્જુને ભગવાન કૃષ્ણ ને કહયું કે પ્રભુ આ દિવાલ પર કંઈક એવું લખો કે સુખમાં વાંચુતો દુખ થાય અને દુખ વાંચું તો સુખ થાય પ્રભુએ લખ્યું
"આ સમય જતો રહેશે"

Thursday, January 5, 2017

धीरे धीरे पढिये

👌मुसीबत में अगर मदद मांगो तो सोच कर मागना क्योंकि मुसीबत थोड़ी देर की होती है और एहसान जिंदगी भर का.....

👌कल एक इन्सान रोटी मांगकर ले गया और करोड़ों कि दुआयें दे गया, पता ही नहीँ चला की, गरीब वो था की मैं....

👌जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..

👌बचपन भी कमाल का था खेलते खेलते चाहें छत पर सोयें या ज़मीन पर, आँख बिस्तर पर ही खुलती थी...

👌खोए हुए हम खुद हैं, और ढूंढते भगवान को हैं...

👌अहंकार दिखा के किसी रिश्ते को तोड़ने से अच्छा है कि माफ़ी मांगकर वो रिश्ता निभाया जाये....

👌जिन्दगी तेरी भी अजब परिभाषा है.. सँवर गई तो जन्नत, नहीं तो सिर्फ तमाशा है...

👌खुशीयाँ तकदीर में होनी चाहिये, तस्वीर मे तो हर कोई मुस्कुराता है...

👌ज़िंदगी भी वीडियो गेम सी हो गयी है एक लेवल क्रॉस करो तो अगला लेवल और मुश्किल आ जाता हैं.....

👌इतनी चाहत तो लाखों रुपये पाने की भी नही होती, जितनी बचपन की तस्वीर देखकर बचपन में जाने की होती है.......

👌हमेशा छोटी छोटी गलतियों से बचने की कोशिश किया करो, क्योंकि इन्सान पहाड़ो से नहीं पत्थरों से ठोकर खाता

​अगर भूल से भी कभी आपको​
​गर्व हो जाये की मेरे बिना तो​
​यहाँ काम चल ही नहीं सकता..​
​तब आप अपने घर की दीवारों पर​
​टंगी अपने पूर्वजों की तस्वीरों की​
​तरफ देख लेना तथा सोचना की क्या​
​उनके जाने से कोई काम रुका है...?​
​जवाब आपको स्वतः ही मिल जायेगा​
​चौरासी लाख योनियों में,​
​एक इंसान ही पैसा कमाता है।​
​अन्य कोई जीव कभी भूखा नहीं मरा,​
​और एक इंसान जिसका कभी पेट नहीं भरा !!​

માતા-પિતાનું ઋણ કેમ કરી ઊતરશે ?

એક નાનો બાળક હતો. બાળકને કેરીનું ઝાડ (આંબો) બહુ ગમતો. જ્યારે નવરો પડે કે તુરંત આંબા પાસે પહોંચી જાય. આંબા પર ચડે, કેરી ખાય અને રમીને થાકે એટલે આંબાના વૃક્ષની ઘટાદાર છાયામાં સૂઈ જાય. બાળક અને આ વૃક્ષ વચ્ચે એક અનોખો સંબંધ હતો.

બાળક જેમ જેમ મોટો થવા લાગ્યો તેમ તેમ એણે આંબા પાસે આવવાનું ઓછું કરી દીધું. અમુક સમય પછી તો સાવ આવતો જ બંધ થઈ ગયો.

આંબો એકલો એકલો બાળકને યાદ કરીને રડ્યા કરે. એક દિવસ અચાનક એને પેલા બાળકને પોતાના તરફ આવતો જોયો. આંબો તો ખુશ થઈ ગયો.

બાળક જેવો નજીક આવ્યો એટલે આંબાએ કહ્યું, "તું ક્યાં ચાલ્યો ગયો હતો ? હું રોજ તને યાદ કરતો હતો. ચાલ હવે આપણે બંને રમીએ." બાળક હવે મોટો થઈ ગયો હતો. એણે આંબાને કહ્યું, "હવે મારી રમવાની ઉંમર નથી.
મારે ભણવાનું છે પણ મારી પાસે ફી ભરવાના પૈસા નથી." આંબાએ કહ્યું "તું મારી કેરીઓ લઈ જા. એ બજારમાં વેચીશ એટલે તને ઘણા પૈસા મળશે. એમાંથી તું તારી ફી ભરી આપજે." બાળકે આંબા પરની બધી જ કેરીઓ ઉતારી લીધી અને ચાલતો થયો.
ફરીથી એ ત્યાં ડોકાયો જ નહીં. આંબો તો એની રોજ રાહ જોતો, એક દિવસ અચાનક એ આવ્યો અને કહ્યું, "હવે તો મારા લગ્ન થઈ ગયા છે. મને નોકરી મળી છે એનાથી ઘર ચાલે છે પણ મારે મારું પોતાનું ઘર બનાવવું છે એ માટે મારી પાસે પૈસા નથી." આંબાએ કહ્યું, "ચિંતા ન કર. મારી બધી ડાળીઓ કાપીને લઈ જા. એમાંથી તારું ઘર બનાવ." યુવાને આંબાની ડાળીઓ કાપી અને ચાલતો થયો.
*આંબો હવે તો સાવ ઠૂંઠો થઈ ગયો હતો. કોઈ એની સામે પણ ન જુવે. આંબાએ પણ હવે પેલો બાળક પોતાની પાસે આવશે એવી આશા છોડી દીધી હતી. એક દિવસ એક વૃદ્ધ ત્યાં આવ્યો. તેણે આંબાને કહ્યું, "તમે મને નહીં ઓળખો પણ હું એ જ બાળક છું જે વારંવાર તમારી પાસે આવતો અને તમે મદદ કરતા." આંબાએ દુઃખ સાથે કહ્યું, "પણ બેટા હવે મારી પાસે એવું કંઈ નથી જે હું તને આપી શકું."
વૃદ્ધે આંખમાં આંસુ સાથે કહ્યું, "આજે કંઈ લેવા નથી આવ્યો. આજે તો મારે તમારી સાથે રમવું છે. તમારા ખોળામાં માથું મૂકીને સૂઈ જવું છે." આટલું કહીને એ રડતાં રડતાં આંબાને ભેટી પડ્યો અને આંબાની સુકાયેલી ડાળોમાં પણ નવા અંકુર ફૂટ્યા.
વૃક્ષ એ આપણાં માતા-પિતા જેવું છે જ્યારે નાના હતા ત્યારે એમની સાથે રમવું ખૂબ ગમતું. જેમ જેમ મોટા થતા ગયા તેમ તેમ એમનાથી દૂર થતા ગયા નજીક ત્યારે જ આવ્યા જ્યારે કોઈ જરૂરિયાત ઊભી થઈ કે કોઈ સમસ્યા આવી. આજે પણ એ ઠૂંઠા વૃક્ષની જેમ રાહ જુવે છે. આપણે જઈને એને ભેટીએ ને એને ઘડપણમાં ફરીથી કૂંપણો ફૂટે...

ક્યાંક કોઈની આંખ ખુલી જાય ...
તો ક્યાંક કોઈની આંખ ભીની પણ થઈ જાય...!!!!!!
🌹🌻🌷💐🌺🌼🌸

Wednesday, January 4, 2017

मुस्कुराहट

​अगर किसी परिस्थिति के लिए आपके पास सही शब्द नहीं है तो सिर्फ मुस्कुरा दीजिये,​
​शब्द उलझा सकते है पर मुस्कुराहट हमेशा काम कर जाती है ।​
​क्योंकि कर्ण ने महाभारत में कहा था कि​ ​दोस्त दुर्योद्धन मुझे मृत्यु से डर नहीं लगता पर​
​भगवान श्रीकृष्ण की निश्चल मुस्कान मेरे सम्पूर्ण अस्तित्व को अंदर से हिला देती हैं।​
😊😊 ​मुस्कुराते रहिये​ 😊😊

Tuesday, January 3, 2017

એક અક્ષર લખવા માટે જો
કાગળ અને કલમ વચ્ચે
પણ સંધર્ષ થતો હોયતો...
વ્હાલા આ તો જીવન છે...
હિટલરનું એક વાક્ય બહુ જ અદભુત છે.

એણે કહ્યું હતું...
તમારા ચરિત્રને ક્યારેય બગીચા જેવું ના બનાવો કે
જ્યાં ગમે તે વ્યક્તિ આવીને લટાર મારીને ચાલી જતી રહે...

ચરિત્રને બનાવો... તો આકાશ જેવું બનાવો...

જેના સુધી પહોંચવાની સૌની પ્રબળ ઇચ્છા હોય.....

संस्कार दिये बिना सुविधायें देना, पतन का कारण है।

श्रीकृष्ण ने एक रात को स्वप्न में देखा कि, एक गाय अपने नवजात बछड़े को प्रेम से चाट रही है। चाटते-चाटते वह गाय, उस बछड़े की कोमल खाल को छील देती है । उसके शरीर से रक्त निकलने लगता है । और वह बेहोश होकर, नीचे गिर जाता है। श्रीकृष्ण प्रातः यह स्वप्न,जब भगवान श्री नेमिनाथ को बताते हैं । तो, भगवान कहते हैं कि :-

यह स्वप्न, पंचमकाल (कलियुग) का लक्षण है ।

कलियुग में माता-पिता, अपनी संतान को,इतना प्रेम करेंगे, उन्हें सुविधाओं का इतना व्यसनी बना देंगे कि, वे उनमें डूबकर, अपनी ही हानि कर बैठेंगे। सुविधा, भोगी और कुमार्ग - गामी बनकर विभिन्न अज्ञानताओं में फंसकर अपने होश गँवा देंगे।

आजकल हो भी यही रहा है। माता पिता अपने बच्चों को, मोबाइल, बाइक, कार, कपड़े, फैशन की सामग्री और पैसे उपलब्ध करा देते हैं । बच्चों का चिंतन, इतना विषाक्त हो जाता है कि, वो माता-पिता से झूठ बोलना, बातें छिपाना,बड़ों का अपमान करना आदि सीख जाते हैं ।

☝याद रखियेगा ! 👇

संस्कार दिये बिना सुविधायें देना, पतन का कारण है। 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻

Monday, January 2, 2017

शुभ और अशुभ कर्मों का फल

*बोध कथा*

काशी में एक ब्राह्मण के सामने से एक गाय भागती हुई किसी गली में घुस गइ तभी वहां एक आदमी आया उसने गाय के बारे में पूछा -

पंडितजी माला फेर रहे थे इसलिए कुछ बोला नहीं बस हाथ से उस गली का इशारा कर दिया जिधर गाय गई थी

पंडितजी इस बात से अंजान थे कि वह आदमी कसाई है, और गौमाता उसके चंगुल से जान बचाकर भागी थीं। कसाई ने पकड़कर गोवध कर दिया।

अंजाने में हुए इस घोर पाप के कारण पंडितजी अगले जन्म में कसाई घर में जन्मे नाम पड़ा, सदना।पर पूर्वजन्म के पुण्यकर्मो के कारण कसाई होकर भी वह उदार और सदाचारी थे।

कसाई परिवार में जन्मे होने के कारण सदना मांस बेचते तो थे, परन्तु भगवत भजन में बड़ी निष्ठा थी एक दिन सदना को नदी के किनारे एक पत्थर पड़ा मिला।

पत्थर अच्छा लगा इसलिए वह उसे मांस तोलने के लिए अपने साथ ले आए।वह इस बात से अंजान थे कि यह वही शालिग्राम थे जिन्हें पूर्वजन्म नित्य पूजते थे ।

सदना कसाई पूर्वजन्म के शालिग्राम को इस जन्म में मांस तोलने के लिए बाँट ( तोल) के रूप में प्रयोग करने लगे।आदत के अनुसार सदना ठाकुरजी के भजन गाते रहते थे।

ठाकुरजी भक्त की स्तुति का पलड़े में झूलते हुए आनंद लेते रहते।बाँट का कमाल ऐसा था कि चाहे आधा किलो तोलना हो, एक किलो या दो किलो सारा वजन उससे पक्का हो जाता।

एक दिन सदना की दुकान के सामने से एक ब्राह्मण निकले, उनकी नजर बाँट पर पड़ी तो सदना के पास आए और शालिग्राम को अपवित्र करने के लिए फटकारा।

उन्होंने कहा- मूर्ख, जिसे पत्थर समझकर मांस तौल रहे हो वे शालिग्राम भगवान हैं। ब्राह्मण ने सदना से शालिग्राम भगवान को
लिया और घर ले आये.

गंगा जल से नहलाया, धूप, दीप,चन्दन से पूजा की। ब्राह्मण को अहंकार हो गया जिस शालिग्राम से पतितों का उद्दार होता है आज एक शालिग्राम का वह उद्धार कर रहा है।

रात को उसके सपने में ठाकुरजी आए और बोले- तुम जहां से लाए हो वहीँ मुझे छोड़ आओ, मेरे भक्त सदन कसाई की भक्ति में जो बात है वह तुम्हारे आडंबर में नहीं।

ब्राह्मण बोला- प्रभु! सदना कसाई का पापकर्म करता है, आपका प्रयोग मांस तोलने में करता है। मांस की दुकान जैसा अपवित्र स्थानआपके योग्य नहीं

भगवान बोले- भक्ति में भरकर सदना मुझे तराजू में रखकर तोलता था मुझे ऐसा लगता है कि वह मुझे झूला रहा हो। मांस की दुकान में आने वालों को भी मेरे नाम का स्मरण कराता है।

मेरा भजन करता है, जो आनन्द वहां मिलता था वह यहां नहीं, तुम मुझे वही छोड आओ। ब्राह्मण शालिग्राम भगवान को वापस सदना कसाई को दे आए।

ब्राह्मण बोला- भगवान को तुम्हारी संगति ही ज्यादा सुहाई। यह तो तुम्हारे पास ही रहना चाहते हैं। ये शालिग्राम भगवान का स्वरुप हैं, हो सके तो इन्हें पूजना बाट मत बनाना।

सदना ने यह सुना अनजाने में हुए अपराध को याद करके दुखी हो गया सदना ने प्राश्चित का निश्चय किया और भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए निकल पड़ा

वह भी भगवान के दर्शन को जाते एक समूह में शामिल हो गए लेकिन लोगों को पूछने पर उसने बता दिया कि वह कसाई का काम करता था

लोग उससे दूर-दूर रहने लगे। उसका छुआ खाते-पीते नहीं थे। दुखी सदना ने उनका साथ छोड़ा और शालिग्रामजी के साथ भजन करता अकेले चलने लगा

सदना को प्यास लगी थी,रास्ते में एक गांव में कुंआ दिखा तो वह पानी पीने ठहर गया। वहां एक सुन्दर स्त्री पानी भर रही थी।वह सदना के सुंदर मजबूत शरीर पर रीझ गई

उसने सदना से कहा कि शाम हो गई है, इसलिए आज रात वह उसके घर में ही विश्राम कर लें,सदना को उसकी कुटिलता समझ में न आई, वह उसके अतिथि बन गये.

रात में वह स्त्री अपने पति के सो जाने पर सदना के पास पहुंच गई और उनसे अपने प्रेम की बात कही, स्त्री की बात सुनकर सदना चौंक गए और उसे पतिव्रता रहने को कहा

स्त्री को लगा कि शायद पति होने के कारण सदना रुचि नहीं ले रहे, वह चली गई और सोते हुए पति का गला काट लाई

सदना भयभीत हो गए,स्त्री समझ गई कि बात बिगड़ जाएगी इसलिए उसने रोना-चिल्लाना शुरू कर दिया पड़ोसियों से कह दिया कि इस यात्री को घर में जगह दी थी चोरी की नीयत से इसने मेरे पति का गला काट दिया,
सदना को पकड़ कर न्यायाधीश के सामने पेश किया गया। न्यायाधीश ने सदना को देखा तो ताड़ गए कि यह हत्यारा नहीं हो सकता। उन्होने बार-बार सदना से सारी बात पूछी

सदना को लगता था कि यदि वह प्यास से व्याकुल गांव में न पहुंचते तो हत्या न होती।वह स्वयं को ही इसके लिए दोषी मानते थे, अतः वे मौन ही रहे

न्यायाधीश ने राजा को बताया कि एक आदमी अपराधी है नहीं पर चुप रहकर एक तरह से अपराध की मौन स्वीकृति दे रहा है। इसे क्या दंड दिया जाना चाहिए ?

राजा ने कहा- यदि वह प्रतिवाद नहीं करता तो दण्ड अनिवार्य है, अन्यथा प्रजा में गलत सन्देश जाएगा कि अपराधी को दंड नहीं मिला।इसे मृत्युदंड मत दो, हाथ काटने का हुक्म दो.

सदना का दायां हाथ काट दिया गया, सदना ने अपने पूर्वजन्म के कर्म मानकर चुपचाप दंड सहा और जगन्नाथपुरी धाम की यात्रा शुरू की

धाम के निकट पहुंचे तो भगवान ने अपने सेवक राजा को प्रियभक्त सदना कसाई की सम्मान से अगवानी का आदेश दिया। प्रभु आज्ञा से राजा गाजे-बाजे लेकर अगुवानी को आया।
सदना ने यह सम्मान स्वीकार नहीं किया तो स्वयं ठाकुरजी ने दर्शन दिए। उन्हें सारी बात सुनाई- तुम पूर्वजन्म में ब्राहमण थे, तुमने संकेत से एक कसाई को गाय का पता बताया था
तुम्हारे कारण जिस गाय की जान गई थी वही स्त्री बनी है जिसके झूठे आरोपों से तुम्हारा हाथ काटा गया। उस स्त्री का पति पूर्वजन्म का कसाई बना था जिसका वध कर गाय ने बदला लिया है

भगवान जगन्नाथजी बोले- सभी के शुभ और अशुभ कर्मों का फल मैं देता हूँ ।अब तुम निष्पाप हो गए हो।घृणित आजीविका के बावजूद भी तुमने धर्म का साथ न छोड़ा

इसलिए तुम्हारे प्रेम को मैंने स्वीकार किया।मैं तुम्हारे साथ मांस तोलने वाले तराजू में भी प्रसन्न रहा।भगवान के दर्शन से सदनाजी को मोक्ष प्राप्त हुआ।

भक्त सदनाजी की कथा हमें बताती है, कि भक्ति में आडंबर नहीं भावना बनाये रखती है।भगवान के नाम का गुणगान करना सबसे बड़ा पुण्य है.

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एक बार *मीठे हलवे की कटोरी* सामने आयी तो ऐसे ही ध्यान आया की इसमें काजू, बादाम,सूजी यह सब तो दिखाई दे रहे हैं पर जिस चीज से इसमें मिठास हैं वह *शक्कर* तो कही नजर ही नही आ रही हैं.....

ठीक ऐसे ही हमारे जीवन में भी कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो दिखाई नही देते पर उनके अपनेपन की मिठास हमारे जीवन को हमेशा आनंदित करती रहती हैं.....!!!